अधिक पूजा पाठ करने वाला व्यक्ति आखिर दुखी क्यों होता है

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अधिक पूजा पाठ करने वाला व्यक्ति आखिर दुखी क्यों होता है

 

शायद इस विषय पर हम सभी ने कभी ना कभी विचार किया होगा और पाया होगा कि शायद उसका कोई निष्कर्ष नहीं मिला वैसे तो लोगों से पूछने पर अक्सर एक   ही उत्तर मिल जाता है की ना जाने उसके भाग्य में कितने दुख रहे होंगे जो उसके उपासना करने से कम हो गए इस कारण वह व्यक्ति इतना दुखी है

दरअसल हमारे जो शास्त्र हैं मुगलों के आक्रमण के कारण वह नष्ट हो गए और हमारी जो पूरी पूजा पद्धति है वह कहीं न कहीं आधी अधूरी सी हो गई और हमें उस पद्धति का पूरा ज्ञान ना होने के कारण नुकसान उठाना पड़ रहा है

जब हम किसी भी मंत्र का जाप करते हैं या साधना करते हैं तो हम यह समझते हैं कि हम एकांत में बैठकर बिना किसी के जानकारी के यह साधना कर रहे हैं दरअसल ऐसा होता नहीं है हम जब भी कोई पूजा पाठ या साधना करते हैं तो वह साधना वह मंत्र उपचार वह पूजन पाठ सारे ब्रह्मांड में गूंजता है और इस ब्रह्मांड में रहने वाली सारी नकारात्मक उर्जा को आकर्षित करता है

जिस कारण वह शक्तियां आपके जीवन में उथल-पुथल मचा देती हैं पूजा पद्धति का सही ज्ञान ना होने के कारण हमारी स्थिति युद्ध में गए उस योद्धा की तरह होती है

जिसकी पास अपने बचाव के लिए कुछ भी नहीं होता है ऐसी स्थिति में हमारा चोट खाना तो बिल्कुल सही होता है और यही साधना में होता है

हम साधना भी बिना किसी रक्षा के शुरू कर देते हैं और हम यही गलती करते हैं जबकि हमारे शास्त्रों में हर साधना के लिए कवच कीलक होता है अगर हम इन का जाप करते हैं तो हम ब्रह्मांड की नकारात्मक शक्तियों से काफी हद तक सुरक्षित हो जाते हैं

काफी साधकों का ऐसा अनुभव ही रहा कि जब उनके ऊपर इन ब्रह्मांड की नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव हुआ जिन्हें हम आम बोलचाल की भाषा में डाकनी और शाकिनी कहते हैं यह साधक की साधना को नष्ट करने के लिए आती है 

साधकों को सपना आते हैं और उन स्वप्न में यह नकारात्मक ऊर्जा नग्न स्त्री का रूप धारण करके आपके साथ जबरन संभोग करती हैं

साधक को ऐसा महसूस होता है जैसे यह सब वास्तविकता में हो रहा हो और उस पर एक वजह और होती है कि यह शक्तियां आपके परिवार में ऐसे व्यक्ति का रूप धारण करके आती हैं

जिसके बारे में ऐसा करना तो दूर सूचना भी पाप है यह कभी आपकी बहन बेटी मौसी बुआ ऐसे रिश्ते का स्वरूप लेकर आती हैं और आपके साथ साधक के साथ जबरन संबंध बनाती हैं

इस कारण साधक मानसिक और शारीरिक रूप से काफी कमजोर हो जाता है और उसकी साधना कहीं ना कहीं खंडित हो जाती है

बगलामुखी साधना में इन सब से बचने के लिए बगलामुखी स्त्रोत, बगलामुखी कवच का एक एक बार पाठ करना चाहिए और इन सब के साथ यदि आपके ऊपर नकारात्मक शक्तियों का बहुत ज्यादा प्रभाव तो आप बगुला सूक्त के 9 पाठ प्रतिदिन9 दिन तक  करें

अगर आप चाहेंगे तो मैं इनके स्त्रोत आपके लिए यहां प्रकाशित करूंगा क्योंकि इन जाटों का शुद्ध रूप में मिलना बहुत मुश्किल है

बगुला  सूक्त के जाप से आपको हर प्रकार के तांत्रिक प्रयोगों से सुरक्षा भी मिलेगी कहा तो यह तक गया है के हिंदू धर्म शास्त्र में सबसे बड़ा प्रयोग भी इसके सामने असर हीन हो जाता है यानी यह आपको हर प्रकार के तांत्रिक प्रयोगों से सुरक्षा देता है


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